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एपस्टिन फाइल्स: सत्ता की हनक का प्रतीक (लेखक - राजीव-राकेश /ईएमएस)

एपस्टिन फाइल्स: सत्ता की हनक का प्रतीक (लेखक - राजीव-राकेश /ईएमएस) : एपस्टीन से जुड़ी जाँच फाइलें केवल किसी एक व्यक्ति के अपराधों का दस्तावेज़ नहीं हैं, बल्कि वे उस वैश्विक मानसिक स्थिति का प्रतिबिंब हैं, जिसमें सत्ता, धन और प्रभाव ने मनुष्यता को पीछे छोड़ दिया।

लोकतंत्र को जगमगाने की जिद्द में जीवन जिया जगदीप छोकर जी ने

लोकतंत्र को जगमगाने की जिद्द में जीवन जिया जगदीप छोकर जी ने : न्ई दिल्ली (ईएमएस)। आज दिल्ली के तीसहजारी कोर्ट में पुस्तकालय भवन के द्वितीय तल पर स्थित चौ. स्वरूप सिंह विधूड़ी रिक्रिएशन हॉल में सायं चार बजे एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन प्रो.जगदीप छोकर जी की

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एक अच्छा स्कूल आवश्यक है! (लेखक- प्रोफेसर(डॉ.)राकेश राणा / ईएमएस)

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए एक अच्छा स्कूल आवश्यक है! (लेखक- प्रोफेसर(डॉ.)राकेश राणा / ईएमएस) : किसी इकोसिस्टम का उपभोक्ता ही गुणवत्ता का अनुभव कर पाता है। शिक्षा व्यवस्था में छात्र, अभिभावक, प्रबंध-तंत्र और अंततः समग्र समाज अपने-अपने दृष्टिकोण से शिक्षा की गुणवत्ता का गुणगान करते है। भारत

पर्यावरण अध्ययनः आस-पास (लेखक- प्रोफेसर (डॉ.) राकेश राणा/ईएमएस)

पर्यावरण अध्ययनः आस-पास (लेखक- प्रोफेसर (डॉ.) राकेश राणा/ईएमएस) : पुस्तक समीक्षा : चौथी कक्षा के लिए पाठ्यपुस्तक पर्यावरण को बच्चे अपने परिवेश के समग्र रुप में देखते है। पर्यावरण उनके लिए कोई औपचारिक विषय नहीं है बल्कि मोहक और खुला प्राकृतिक प्रांगण है। चौथी

पर्यावरण अध्ययनः आस-पास (लेखक- प्रोफेसर (डॉ.) राकेश राणा/ईएमएस)

पर्यावरण अध्ययनः आस-पास (लेखक- प्रोफेसर (डॉ.) राकेश राणा/ईएमएस) : पुस्तक समीक्षा : चौथी कक्षा के लिए पाठ्यपुस्तक पर्यावरण को बच्चे अपने परिवेश के समग्र रुप में देखते है। पर्यावरण उनके लिए कोई औपचारिक विषय नहीं है बल्कि मोहक और खुला प्राकृतिक प्रांगण है। चौथी

भारत को उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक एक सूत्र में पिराए हैं ‘राम’ - Apka Akhbar

भारत को उत्तर से दक्षिण तक और पूरब से पश्चिम तक एक सूत्र में पिराए हैं ‘राम’ - Apka Akhbar : डॉ. राकेश राणा। राम का अतीत इतना व्यापक और विस्तारित है कि उस पर समझ और संज्ञान की सीमाएं है। उन्हें चिन्हित करना बहुत दूर की कोड़ी है। भारतीय समाज में राम उस वट-वृक्ष की तरह है जिसकी छत्रछाया में भक्त, आलोचक, आम, खास, आराधक, विरोधक, सम्बोधक सबके सब न जाने कितने सालो से एक

पितृसत्ता पर सीधा प्रहार करती फिल्म स्त्री-2 (लेखिका- डॉ. पूजा दिक्षित/ ईएमएस)

पितृसत्ता पर सीधा प्रहार करती फिल्म स्त्री-2 (लेखिका- डॉ. पूजा दिक्षित/ ईएमएस) : शैतान ने जो सबसे बड़ी चाल चली, वह दुनिया को यह विश्वास दिलाना था कि उसका कोई अस्तित्व नहीं है। द यूजुअल सस्पेक्ट्स। यह उद्धरण स्त्री- 2 के लिए एक उपयुक्त प्रस्तावना के रूप में कार्य करता है। एक हॉरर